नेहरु नगर में जीडीए की प्रस्तावित आवासीय योजना पर संकट!

08-10-2020 18:19:21
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गाजियाबाद। नेहरु नगर में जीडीए की प्रस्तावित आवासीय योजना पर संकट के बादल मंडराते दिख रहे हैं। प्राधिकरण बोर्ड सदस्य और नगर निगम पार्षदों ने संबंधित जमीन का भू उपयोग आवासीय किए जाने को लेकर सवाल उठाए हैं। प्राधिकरण बोर्ड सदस्य और नगर निगम पार्षदों ने इस संदर्भ में
गाजियाबाद विकास प्राधिकरण सचिव संतोष कुमार राय संग बैठक कर उनके समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज कराई। दरअसल नगर निगम पार्षद, जीडीए बोर्ड सदस्य हिमांशु मित्तल और राजेंद्र त्यगी ने इस मामले को लेकर बीते मार्च माह में अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए उनके समाधान की मांग की थी। उक्त आपत्तियों के निराकरण को लेकर गठित समिति की एक बैठक 8 अक्टूबर को आहूत की गई थी। जिसमें नगर निगम पार्षद अनिल स्वामी, राजेंद्र त्यागी एवं हिमांशु मित्तल ने अपना पक्ष रखा और जीडीए गोदाम की भूमि का लैंड यूज बदलने के प्रस्ताव को लेकर अपना पक्ष रखा और इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

महानगर योजना ले-आउट प्लान के मूल स्वरुप में नहीं किया जा सकता किसी प्रकार का संशोधन   

प्राधिकरण बोर्ड सदस्य और नगर निगम पार्षदों ने कहा कि तथ्यात्मक रूप से महानगर योजना के ले आउट प्लान के मूल स्वरुप में किसी भी प्रकार का
संशोधन नहीं किया जा सकता और उसके मुख्य सवरूप को ही बदला जा सकता है। जनसंख्या घनत्व में परिवर्तन भी नहीं किया जा सकता। साथ ही
नियमानुसार ग्रीन बेल्ट की जमीन को किसी भी रूप में परिवर्तित नहीं किया जा सकता है। उन्होंने दावा किया कि गोदाम से संबंधित भूमि को गाजियाबाद
महानगर योजना एवं जोनल पलानिंग इत्यादि किसी में भी आवासीय के रूप में नहीं दिखाया गया है, सभी में यह ग्रीन बेल्ट या ओपन स्पेस के रूप में
दिखाया गया है।

कॉलोनीवासियों से वसूला जा चुका है संबंधित भूमि का मूल्य

किसी भी महायोजना में खाली पड़ी भूमि या बेकार पड़ी भूमि या खेल के मैदान, सड़क के रूप में छोड़ी गई अविक्रय शील भूमि के मूल्य को भी विक्रय शील भूमि के मूल्य में शामिल करके आवंटियों से वसूला जाता है। ऐसी स्थिति में इस भूमि का मूल्य वहां के भूखंड आवंटियों से वसूला जा चुका है। निगम
पार्षदों ने गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के अधिकारियों को नेशनल हरित प्राधिकरण के कुछ निर्णयों से भी अवगत कराया, जिसमें ऐसे कार्य को करने के लिए बहुत स्पष्ट तौर से मना किया गया है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय एवं नेशनल हरित प्राधिकरण ने अपने निर्णयों में ग्रीन बेल्ट एवं पार्क के भू उपयोग परिवर्तन करने के लिए मनाही की गयी है और हरित क्षेत्रफल के संरक्षण की बात कही गयी है।

गाजियाबाद की जनता को कमजोर न समझें अफसर

निगम पार्षदों ने अफसरों को चेताया कि गाजियाबाद की जनता को कमजोर समझते हुए गोदाम की जमीन का भू-उपयोग परिवर्तित ना करें, अन्यथा यह
लड़ाई लम्बी लड़ी जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के अधिकारी अपनी मनमर्जी करते हुए नियम विरुद्ध जाकर इस भूखंड का भू-उपयोग परिवर्तित करने की कोशिश करते हैं तो हम लोग किसी भी स्थिति में चुप नहीं बैठेंगे और संबंधित स्थल पर प्राधिकरण को कार्य नहीं करने दिया जाएगा। साथ ही संबंधित अदालतों हाई कोर्ट तथा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में भी इस मामले से जुड़े अधिकारियों के खिलाफ नाम के साथ वाद दायर किया जाएगा।

भू-उपयोग परिवर्तित करके बेचने की भूल न करे प्राधिकरण

पार्षद अनिल स्वामी कहा कि यह सामूदायिक भूमि है, आप इसमें थाना या पोस्ट ऑफिस या अन्य कोई कम्युनिटी सेवा देने वाली चीजें बढ़ा सकते हैं,
इसके अलावा शहर के लिए बच्चों का एक पार्क भी बना सकते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि भू-उपयोग को आवासीय में परिवर्तित करके गाजियाबाद विकास प्राधिकरण इसे बेचने की भूल कदापि न करे।

किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जायेगा  भू उपयोग परिवर्तन

उन्होंने बताया कि जीडीए के अपने मास्टर प्लान 2021 में भी स्पष्ट कहा गया है कि गाजियाबाद में प्रति 1000 व्यक्ति केवल 3800 वर्ग मीटर हरित क्षेत्रफल ही उपलब्ध है, जबकि नियम अनुसार यह 8000 वर्ग मीटर प्रति 1000 व्यक्ति होना चाहिए, यह स्थिति 2005 की है। बोर्ड सदस्य और पार्षदों ने जीडीए अधिकारियों को स्पष्ट रूप से अवगत करा दिया है कि नेहरु नगर गोदाम की जमीन के भू उपयोग परिवर्तन को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जायेगा।


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