दिल-ए-नादां तुझे हुआ क्या है ... बेसमय दगा देने की वजह क्या है...

25-06-2021 12:25:31
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दिल-ए-नादां तुझे हुआ क्या है ...बेसमय दगा देने की वजह क्या है...

- आलोक यात्री -

महिला और पुरुषों की सेहत को लेकर किए गए दो अलग-अलग अध्ययनों के नतीजे खासे चौंकाने वाले हैं। पुरुषों की सेहत के बारे में आकलन बताता है कि हफ्ते में 55 घंटे से अधिक काम करने वाले अधिकांश पुरुष हृदय रोग या हृदयाघात का शिकार हो रहे हैं। वहीं महिलाओं में देखभाल की कमी उन्हें दिल का मरीज बना रही है। महिलाओं में हृदय रोग पर पहली बार जारी वैश्विक रिपोर्ट में शोधकर्ताओं ने खुलासा किया है कि जागरूकता और देखभाल के अभाव में भारत में तीन फीसदी तो चीन में 10 फीसदी महिलाएं तेजी से दिल की मरीज बन रही हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कार्डियो वैस्कुलर डिसीज (सीवीडी) इसका प्रमुख कारण है

प्रति एक लाख पर 6402 महिलाएं हृदय संबंधी बीमारियों से रही हैं जूझ

महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर किए गए लासेंट वुमन एंड कार्डियो वैस्कुलर डिसीज कमीशन के वैश्विक अध्ययन में खुलासा हुआ है कि साल 2019 में दुनिया भर में 27.5 करोड़ महिलाएं हृदय रोग से जुड़ी गंभीर बीमारियों की चपेट में आईं थीं। जो इस बात का संकेत है कि प्रति एक लाख पर 6402 महिलाएं हृदय संबंधी बीमारियों से जूझ रही हैं। आंकड़े यह भी बताते हैं कि महिलाओं में हृदय रोग से सबसे अधिक मृत्यु दर मध्य एशिया, पूर्वी यूरोप, उत्तरी अफ्रीका और मिडिल ईस्ट में दर्ज की गई है। यहां हृदय रोग से प्रति लाख तीन सौ से अधिक महिलाओं की मौत होती है।

महिलाओं में हृदय संबंधी बीमारियां होने के हैं विभिन्न कारण

रिपोर्ट में इस बात का भी खुलासा किया गया है कि महिलाओं में हृदय संबंधी बीमारियां होने के पीछे विभिन्न कारण हैं। समय से पहले रजोनिवृत्ति, गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज व रक्तचाप तथा अपरिपक्व प्रसव भी हृदय रोग जैसी बीमारियों को दावत देते हैं। इसके अलावा उच्च रक्तचाप, मोटापा, डिस्लिपिमेडिया, डायबिटीज, अनहेल्दी डाइट, खराब जीवनशैली, ड्रग, शराब और तंबाकू का सेवन भी हृदय रोग व आघात के खतरों को बढ़ाता है। मानसिक तनाव, घरेलू हिंसा, आर्थिक व सामाजिक तौर पर हुई हानि एवं प्रर्यावरण से जुड़े जोखिम भी महिलाओं की सेहत के लिए घातक हैं।

हृदय रोग से हो रही मौतों की रोकथाम के किए जा रहे हैं प्रयास


लासेंट वूमन एंड कार्डियो वेस्कुलर डिसीज कमीशन में 11 विभिन्न देशों की 17 प्रमुख महिला विशेषज्ञों को शामिल कर इस रोग से हो रही मौतों की रोकथाम के प्रयास किए जा रहे हैं। इस कमीशन का उद्देश्य वैश्विक स्तर पर महिलाओं की हृदय रोग के चलते होने वाली मौत को कम करना है। शोधकर्ताओं ने वर्ष 2030 तक महिलाओं में हृदय रोग को कम करने के लिए उपचार और रोकथाम के लिए 10 महत्वाकांक्षी सिफारिशों की रूपरेखा तैयार की है। इसमें महिलाओं के लिए स्वास्थ्य देखभाल प्रदाताओं और रोगियों का जल्दी पता लगाने को शिक्षित करना, अत्यधिक आबादी वाले और अविकसित क्षेत्रों में हृदय से जुड़े स्वास्थ्य कार्यक्रमों को बढ़ाना और महिलाओं में हृदय रोग पर होने वाले शोध को बढ़ावा देना शामिल है।

पुरुषों का अधिक घंटों तक काम करना जानलेवा हो रहा है साबित

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ)  की एक ताजा रिपोर्ट इस बात का खुलासा करती है कि अधिक घंटों तक काम करना पुरुषों के लिए भी जानलेवा साबित हो रहा है। आईएलओ और डब्ल्यूएचओ की यह रिपोर्ट बताती है कि अध्ययन वर्ष के दौरान एक हफ्ते में 55 घंटे से अधिक काम करने वाले 7.45 लाख लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। इनमें से 3.8 लाख लोगों की मौत स्ट्रोक (आघात) तो 3.47 लोगों की मौत हृदय रोग के कारण हुई।

विश्वभर में 194 देशों के लोगों पर किया गया अध्ययन

यह अध्ययन विश्वभर में 194 देशों के लोगों पर किया गया। अध्ययन के अनुसार, सप्ताह में 55 घंटे से अधिक काम करने वालों में स्ट्रोक की आशंका 35 प्रतिशत और इस्केमिक हार्ट डिजीज होने का खतरा 17 प्रतिशत अधिक रहता है। इस रिपोर्ट के अनुसार यह शोध वर्ष 2000 से 2016 के बीच किया गया था। इसलिए इसमें कोरोना महामारी काल के आंकड़े सम्मिलित नहीं हैं, जबकि कोरोनाकाल में घर से कार्य (वर्क फ्रॉम होम) करने की व्यवस्था और आर्थिक कमजोरी के कारण स्थिति और बिगड़ी है। नतीजतन ऐसे कार्य करने वाले 9 प्रतिशत लोगों को पहले के मुकाबले लम्बे (अधिक) समय तक काम करना पड़ रहा है।

हृदय रोग से 22 फ़ीसदी और आघात से 19 फ़ीसदी बढ़ी मौतें

साल 2016 में दुनिया भर में 49 करोड़ लोगों ने प्रति हफ्ते 55 घंटों से अधिक काम किया। साल 2000 और 2016 के मध्य 16 वर्ष के विवरण के अध्ययन में देखा गया कि लंबे समय तक काम करने की वजह से हृदय रोग से 22 फीसदी और हृदयाघात से 19 फीसदी मौतें बढ़ी हैं। लिहाजा यह पूछना बेकार है 'दिल-ए-नादान तुझे हुआ क्या है, बेसमय इस मौत की वजह क्या है'? साल 2000, 2010 और 2016 में हुए तीनों अध्ययनों में सामने आया है कि कार्यस्थल पर अन्य जोखिमों की तुलना में लंबे घंटों तक काम करने से ज्यादा बीमारियां पैदा हो रही हैं।

दिनोंदिन बढ़ रही है लंबे समय तक काम करने वालों की संख्या

लंबे समय तक काम करने वाले लोगों की संख्या दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। यह प्रवृत्ति काम से संबंधित बीमारियों और समय पूर्व मृत्यु का जोखिम बढ़ा रही है। कोरोना काल में यह प्रवृत्ति और जोखिम दोनों बढ़ गए हैं। हाल ही के कुछ वर्षों में यह भी देखने में आया है कि काम के बीच कर्मचारियों के मनोरंजन के लिए साधन भी उपलब्ध करवाए गए हैं। लेकिन इनके सार्थक नतीजे अभी सामने नहीं आए हैं। महिला हो या पुरुष दोनों को ही इस बात पर गौर करने की जरूरत है कि सेहत ही‌ सबसे बड़ी नियामत है।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं कवि हैं।)


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